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अमेरिकी राष्ट्रपति का बीबीसी पर भ्रामक रिपोर्टिंग का आरोप, 10 अरब डॉलर के हर्जाने का मुकदमा दायर

बीबीसी की माफी के बाद भी नहीं थमे ट्रंप, अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया वॉशिंगटन

Anita Amoli (Writer)

16 दिसंबर 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति का बीबीसी पर भ्रामक रिपोर्टिंग का आरोप, 10 अरब डॉलर के हर्जाने का मुकदमा दायर

बीबीसी की माफी के बाद भी नहीं थमे ट्रंप, अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश सार्वजनिक प्रसारक बीबीसी के खिलाफ बड़ा कानूनी कदम उठाया है। ट्रंप ने बीबीसी पर मानहानि और भ्रामक रिपोर्टिंग का आरोप लगाते हुए 10 अरब अमेरिकी डॉलर के हर्जाने की मांग के साथ मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि बीबीसी ने जानबूझकर उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

फ्लोरिडा में दायर 33 पन्नों की याचिका में ट्रंप ने कहा है कि बीबीसी ने उनके खिलाफ “झूठी, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण” सामग्री प्रसारित की। मुकदमे में दावा किया गया है कि प्रसारक ने न केवल पत्रकारिता की मर्यादाओं का उल्लंघन किया, बल्कि अनुचित व्यापारिक व्यवहार अपनाते हुए राजनीतिक हस्तक्षेप भी किया।

भाषण की एडिटिंग को लेकर विवाद

ट्रंप का कहना है कि बीबीसी ने 6 जनवरी 2021 को दिए गए उनके भाषण के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर इस तरह पेश किया, जिससे उनके बयान का अर्थ पूरी तरह बदल गया। आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील वाले हिस्से को हटा दिया गया और ऐसे शब्दों को जोड़ दिया गया, जो उन्होंने कहे ही नहीं थे।

पहले माफी, अब मुकदमा

इस विवाद को लेकर ट्रंप पहले भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे चुके थे। इसके बाद बीते महीने बीबीसी ने भाषण की एडिटिंग को लेकर ट्रंप से माफी तो मांगी थी, लेकिन मानहानि के आरोपों को खारिज कर दिया था। बीबीसी के अध्यक्ष समीर शाह ने इसे संपादकीय निर्णय में हुई चूक बताया था। इस मामले के सामने आने के बाद बीबीसी के शीर्ष समाचार अधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था।

डॉक्यूमेंट्री बनी विवाद की जड़

विवाद की जड़ बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री है, जो 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले ‘ट्रंप: ए सेकेंड चांस?’ शीर्षक से प्रसारित की गई थी। इस डॉक्यूमेंट्री में 6 जनवरी 2021 के भाषण के तीन अलग-अलग बयानों को जोड़कर एक ही संदर्भ में दिखाया गया, जबकि वे कथन लगभग एक घंटे के अंतराल में दिए गए थे। इससे ऐसा प्रतीत हुआ कि ट्रंप ने समर्थकों को उग्र कदम उठाने के लिए प्रेरित किया, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील वाले अंश को प्रसारण से बाहर रखा गया।

ट्रंप का तीखा बयान

व्हाइट हाउस में बिना सवाल-जवाब के दिए गए बयान में ट्रंप ने कहा कि बीबीसी ने उनके “मुंह में ऐसे शब्द डाल दिए, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं”। उन्होंने कहा कि उन्होंने देशभक्ति और शांति की बात की थी, लेकिन वही हिस्से जानबूझकर नहीं दिखाए गए।

कानूनी चुनौतियां भी संभव

यह मुकदमा फ्लोरिडा की अदालत में दायर किया गया है, क्योंकि ब्रिटेन में मानहानि से जुड़े मामलों की समयसीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में भी इस केस को लेकर चुनौतियां सामने आ सकती हैं, क्योंकि विवादित डॉक्यूमेंट्री वहां आधिकारिक रूप से प्रसारित नहीं की गई थी।

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