नई दिल्ली – आईआरसीटीसी से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की अदालत ने तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी प्रसाद यादव सहित कुल नौ व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप तय करने का निर्देश दिया है। इस प्रक्रिया के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लगभग 44.75 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त कर ली थीं।
ईडी ने सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए एफआईआर के आधार पर 2002 के प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच आरम्भ की थी। उस एफआईआर में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, पी.सी. गुप्ता और कई अन्य के नाम शामिल थे।
जाँच में ईडी ने यह आरोप लगाया कि रेल मंत्री के पद पर रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने पद का दुरुपयोग किया। उनके अनुसार, पुरी और रांची स्थित रेलवे होटलों के संचालन का ठेका सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया, जबकि इसके बदले डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को लगभग दो एकड़ जमीन कम कीमत पर हस्तांतरित की गई।
ईडी के अनुसार, डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्रेम चंद गुप्ता के परिवार के नियंत्रण में थी। बाद में कंपनी के शेयरों की खरीद‑फरोख्त के माध्यम से राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को उस कंपनी तथा उसकी जमीन पर नियंत्रण मिलने का आरोप है।
सीबीआई ने 24 अगस्त 2018 को दिल्ली के राउज एवेन्यू डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अभियोजन शिकायत दायर की थी। उसी क्रम में ईडी ने PMLA की धारा 5 के तहत कार्रवाई करते हुए 44,75,00,000 रुपये मूल्य की संपत्तियों को जब्त किया और इस जब्ती को एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी की मंजूरी भी प्राप्त हो चुकी है।
अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी प्रसाद यादव और छह अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ PMLA की धारा 3 के साथ धारा 4 के तहत आरोप तय करने का आदेश जारी किया है।


