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पौड़ी के ग्रामीणों को पशुपालन योजनाओं से 1,726 स्वरोजगार अवसर, 8.64 करोड़ की सरकारी सहायता

पशुपालन विभाग की कई पहलों ने ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद की है।

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admin (Editor in Chief)

9 सितंबर 2026

पौड़ी के ग्रामीणों को पशुपालन योजनाओं से 1,726 स्वरोजगार अवसर, 8.64 करोड़ की सरकारी सहायता

पौड़ी में ग्रामीण इलाकों में पशुपालन को स्वरोजगार का साधन बनाने हेतु लागू की गई विभिन्न योजनाओं ने 1,726 ग्रामीणों को सीधे लाभ पहुँचाया है। वित्तीय वर्ष 2021‑22 से 2025‑26 तक विभाग ने इन लाभार्थियों को कुल ₹8,64,90,506 की आर्थिक सहायता प्रदान की, जिसका मूल उद्देश्य ग्रामीण आय में वृद्धि और आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करना है।

मुख्य योजनाओं का विस्तार

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा के अनुसार, विभाग ने विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और पात्र परिवारों को पशुपालन‑आधारित स्वरोजगार से जोड़ने पर बल दिया है। आर्थिक सहायता के साथ‑साथ लाभार्थियों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और विभागीय सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

गौपालन योजना

पिछले पाँच वर्षों में गौपालन योजना के तहत 361 परिवारों को कुल ₹1.30 करोड़ की सहायता दी गई। यह योजना किसानों को गौ‑पालन के माध्यम से स्थायी आय उत्पन्न करने में मदद करती है।

बकरी पालन योजनाएँ

  • सामान्य वर्ग बकरी पालन योजना के तहत 162 लाभार्थियों को ₹1.02 करोड़ की आर्थिक मदद मिली।
  • एससीपी बकरी पालन योजना में 241 ग्रामीणों को ₹1.52 करोड़ की सहायता प्रदान की गई।
  • महिला बकरी पालन योजना के अंतर्गत 82 महिलाएँ कुल ₹28.70 लाख की राशि प्राप्त कर रही हैं।

मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन

इस मिशन के तहत 305 पात्र ग्रामीणों को ₹1.92 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई, जिससे वे आधुनिक पशुपालन इकाइयाँ स्थापित कर सकें।

अन्य प्रमुख पहलों की झलक

विभाग द्वारा गौ‑पालन, बकरी‑पालन, महिला बकरी‑पालन, मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन, गोट वैली और ब्रायलर फार्म जैसी कई योजनाएँ चल रही हैं। ये सभी पहलें ग्रामीणों को दूध, मांस, अंडा आदि उत्पादन से आय उत्पन्न करने के लिए प्रेरित करती हैं।

भविष्य की दिशा

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा, पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मुख्य स्तंभ है। विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक पात्र ग्रामीण, महिलाएँ और युवा इन योजनाओं से जुड़ें, जिससे न केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी बल्कि जिले की समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

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