गुरुवार, 20 अगस्त 2026
मुख्य पृष्ठ
National 12:15 pm3 मिनट पठन समय

अरावली पर खतरा: सुप्रीम कोर्ट के मानकों के बाद ‘सेव अरावली’ अभियान तेज

Save Aravalli Campaign: दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखलाओं में शामिल अरावली एक बार फिर

Anita Amoli

Anita Amoli (Writer)

21 दिसंबर 2025

18.4K बार पढ़ा गया
अरावली पर खतरा: सुप्रीम कोर्ट के मानकों के बाद ‘सेव अरावली’ अभियान तेज

फोटो: ग्राउंड रिपोर्ट - विशेष संवाददाता (दैनिक एक्सप्रेस)

Save Aravalli Campaign: दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखलाओं में शामिल अरावली एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट में खनन से जुड़े एक मामले में केंद्र सरकार के जवाब और उसके बाद तय किए गए नए मानकों ने देशभर में बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर ‘सेव अरावली’ अभियान तेज हो गया है।

अरावली पर्वत शृंखला दिल्ली से गुजरात तक करीब 650–670 किलोमीटर में फैली है और थार रेगिस्तान को उत्तर भारत की ओर बढ़ने से रोकने में अहम भूमिका निभाती है। यह न केवल जलवायु संतुलन बनाए रखती है, बल्कि भूजल संरक्षण, जैव विविधता और वायु गुणवत्ता के लिए भी बेहद जरूरी मानी जाती है।

मामला तब गरमाया जब सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की पहचान को लेकर कहा कि अब केवल 100 मीटर से अधिक ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली का हिस्सा माना जाएगा। इस पर आपत्ति जताते हुए पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इससे खासकर राजस्थान में अरावली की बड़ी संख्या में छोटी पहाड़ियां कानूनी संरक्षण से बाहर हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक राजस्थान में अरावली की लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियां 100 मीटर की ऊंचाई की शर्त पूरी नहीं करतीं। ऐसे में आशंका है कि इन इलाकों में खनन का रास्ता खुल सकता है, जिसका असर पर्यावरण और जल स्रोतों पर पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर बेहतर प्रबंधन योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें यह तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और किन इलाकों में सीमित गतिविधियों की अनुमति होगी।

इधर इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई नेताओं ने चेतावनी दी है कि अरावली कमजोर हुई तो पानी, पर्यावरण और हवा की गुणवत्ता पर दूरगामी असर पड़ेगा। वहीं, भाजपा की ओर से कांग्रेस पर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं, हालांकि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी अरावली की संकीर्ण परिभाषा पर पुनर्विचार की मांग की है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली केवल पहाड़ियों की ऊंचाई का विषय नहीं, बल्कि एक संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र है, जिसकी अनदेखी भविष्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है।

पर्यावरणविदों का कहना है कि अरावली केवल ऊंचाई नहीं, बल्कि एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र है। यदि इसका संतुलन बिगड़ा, तो उसका असर आने वाली पीढ़ियों तक महसूस किया जाएगा।

“छात्रों की स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अनियमितताओं पर कठोरतम प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।”

आगे पढ़ें (Read Next)

उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद प्रेस दौरे पर भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र का किया दौराUttarakhand

उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद प्रेस दौरे पर भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र का किया दौरा

इस दौरे का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों को तेलंगाना में केंद्र सरकार की प्रमुख विकास गतिविधियों

1 सित॰ 2026
पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल के लिए 5 दिवसीय हैदराबाद प्रेस टूरUttarakhand

पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल के लिए 5 दिवसीय हैदराबाद प्रेस टूर

उत्तराखंड के 13 पत्रकारों का समूह हैदराबाद में क्रियान्वित भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं का

31 अग॰ 2026