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लाल किला परिसर में शुरू हुआ गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी वर्ष का विशेष समागम

गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत सिर्फ सिख इतिहास की नहीं, बल्कि मानव अधिकारों की

Anita Amoli

Anita Amoli (Writer)

24 नवंबर 2025

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लाल किला परिसर में शुरू हुआ गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी वर्ष का विशेष समागम

फोटो: ग्राउंड रिपोर्ट - विशेष संवाददाता (दैनिक एक्सप्रेस)

गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत सिर्फ सिख इतिहास की नहीं, बल्कि मानव अधिकारों की अनूठी मिसाल- सीएम

दिल्ली के लाल किला परिसर में देश-विदेश से संगत बड़ी संख्या में पहुँच रही

दिल्ली:लाल किला परिसर रविवार को आध्यात्मिक वातावरण से भर उठा, जब गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी वर्ष के सम्मान में तीन दिवसीय स्मृति समारोह का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत श्रद्धापूर्ण माहौल में हुई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने समागम में पहुंचकर कीर्तन दरबार के दौरान गुरु साहिब के चरणों में अरदास की।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत सिर्फ सिख इतिहास की नहीं, बल्कि मानव अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की अनूठी मिसाल है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ जो खड़ा होना सिखाया, वह आज भी समाज के लिए मार्गदर्शन है। उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बड़े स्तर पर आयोजित यह कार्यक्रम दिल्ली की आध्यात्मिक धरोहर को नए स्वरूप में सामने लाता है।

कार्यक्रम दिल्ली सरकार और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के संयुक्त प्रयासों से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश से संगत बड़ी संख्या में पहुँच रही है। दोनों संस्थाओं की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने व्यवस्थाओं में सहयोग देने वाले सभी सेवकों और कमेटी सदस्यों का धन्यवाद भी किया।

‘शहादत की धरती पर लौटी वही रौशनियां’

कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली की धरती ने गुरु तेग बहादुर साहिब की अमर शहादत को अपनी आँखों से देखा है और आज उसी स्थान पर उनके प्रकाश से वातावरण फिर से आलोकित हो रहा है। उन्होंने कहा कि लाल किला इस ऐतिहासिक अध्याय का साक्षी रहा है और आज यह आयोजन श्रद्धा का नया इतिहास रच रहा है।

नगर कीर्तन के साथ हुआ आध्यात्मिक यात्रा का प्रारंभ

सुबह कार्यक्रम की शुरुआत गुरुद्वारा शीशगंज साहिब से नगर कीर्तन के रूप में हुई, जहां से गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप को पांच प्यारों की अगुवाई में लाल किले तक लाया गया। इस चल समारोह में कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, DSGMC के प्रधान हरमीत सिंह कालका, महासचिव जगदीप सिंह काहलों और हजारों भक्त शामिल हुए।

लाल किला पहुँचने के बाद प्रारंभिक अरदास के साथ तीन दिवसीय समागम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। प्रतिदिन शाम को विशाल कीर्तन दरबार आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रमुख रागी जत्थे गुरु साहिब की वाणी का कीर्तन प्रस्तुत करेंगे। श्रद्धालुओं की अधिक संख्या को देखते हुए लगभग 50 हजार लोगों की बैठने की क्षमता वाला मुख्य पंडाल तैयार किया गया है, साथ ही रात्रि प्रवास के लिए टेंट सिटी भी बनाई गई है।

“छात्रों की स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अनियमितताओं पर कठोरतम प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।”

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